
चंडीगढ़। ऑल पंजाब क्रशर एसोसिएशन ने पंजाब में स्टोन क्रशर उद्योग को पेश आ रही ऑपरेशंस संबंधी समस्याओं, विभागीय प्रक्रियाओं में अड़चनों, पोर्टल की तकनीकी खामियों और विभिन्न शुल्कों के बढ़ते बोझ पर चिंता जताई है। एसोसिएशन ने राज्य सरकार से इन समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो उद्योग से जुड़े लोग प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने और क्रशर इकाइयों का ऑपरेशन बंद करने के लिए मजबूर होंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए एसोसिएशन के चेयरमैन मेजर बीडी गुप्ता, अध्यक्ष मनप्रीत सिंह गिल और अन्य प्रतिनिधियों ने कहा कि क्रशर उद्योग पंजाब में सड़कों, पुलों, राष्ट्रीय राजमार्गों और अन्य निर्माण परियोजनाओं के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध कराता है। राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने के बावजूद इस उद्योग की समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
गिल ने बताया कि पहले क्रशर इकाइयां उद्योग विभाग के अधीन थी और पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से आवश्यक मंजूरियां लेकर काम करती थी। वर्ष 2015 में इन्हें खान एवं भूविज्ञान विभाग के अधीन लाए जाने के बाद से उद्योग को नीतिगत अस्थिरता और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि क्रशर उद्योग खनन करने वाला क्षेत्र नहीं, बल्कि एक संगठित प्रोसेसिंगइंडस्ट्रीहै। ये इकाइयां खदानों से कच्चा माल खरीदती हैं और उस पर रॉयल्टी, जीएसटी सहित सभी निर्धारित सरकारी फीसका भुगतान करती हैं। इसके बावजूद उद्योग को ऐसी प्रक्रियाओं और नियमों का सामना करना पड़ रहा है, जिनसे कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है।
एसोसिएशन ने बिजली की बार-बार होने वाली कटौती को भी एक बड़ी समस्या बताया। बिजली आपूर्ति बाधित होने से वाहनों में सामग्री लोड करने और अन्य कामकाज में देरी होती है। एसोसिएशन ने मांग की कि ऐसी स्थिति में काम जारी रखने के लिए अधिक क्षमता वाले जनरेटर सेट इस्तेमाल करने की अनुमति और उससे जुड़े नियमों को स्पष्ट किया जाए।
विभागीय पोर्टल की तकनीकी खामियों पर चिंता जताते हुए प्रतिनिधियों ने कहा कि कई बार जरूरी क्यू-बिल नहीं बन पाते। इसके कारण सामग्री से लदे वाहन क्रशर परिसरों में फंसे रहते हैं और अनावश्यक देरी होती है। एसोसिएशन ने पोर्टल को दुरुस्त करने और उसकी कार्यप्रणाली को व्यावहारिक बनाने की मांग की।
एसोसिएशन ने स्टॉक रिटर्न की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने और एक्सपेंशन फैक्टर की गणना से जुड़े लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने की मांग भी उठाई। प्रतिनिधियों के अनुसार, पोर्टल पर दर्ज कई विसंगतियों को समय रहते दूर नहीं किया जाता, जबकि निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने के बावजूद उद्योग संचालकों को नोटिस जारी हो जाते हैं। उन्होंने क्रशर इकाइयों के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को निरंतर जारी रखने की मांग की, ताकि अंतिम समय में आपत्तियों के कारण कारोबार प्रभावित न हो।
टैक्स और अन्य वित्तीय देनदारियों के संबंध में एसोसिएशन ने कहा कि मिनरल प्रोसेसिंग फीस (एमपीएफ) संबंधित कानून के प्रावधानों के अनुसार प्रोसेस की गई सामग्री पर ही लगाई जानी चाहिए, न कि बिक्री के बिलों के आधार पर। एसोसिएशन ने यह भी मांग की कि शुल्क लागू होने से पहले उपलब्ध स्टॉक पर वसूली गई अतिरिक्त राशि वापस की जाए।
प्रतिनिधियों ने कहा कि मिनरल प्रोसेसिंग फीस, एनवायर्नमेंटल मैनेजमेंट फंड (ईएमएफ), पंजीकरण शुल्क, जीएसटी और बिजली खर्च सहित विभिन्न वित्तीय देनदारियों का कुल बोझ उद्योग के लिए चुनौती बन रहा है। उन्होंने इन शुल्कों को तर्कसंगत बनाने और पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की मांग की।
एसोसिएशन ने अंतरराज्यीय चेक पोस्टों पर पर्याप्त निगरानी नहीं होने से सरकारी राजस्व को होने वाले नुकसान का मुद्दा भी उठाया। प्रतिनिधियों ने अवैध खनन पर सख्ती से रोक लगाने और वैध तरीके से काम करने वाली इकाइयों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि नई नीतियां, नियम या कार्यप्रणाली तय करने से पहले उद्योग के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन ने माइनएवं जियोलॉजीविभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी खदानों, माइनिंग स्थलों और नदी तल पर अवैध माइनिंगको रोकना होनी चाहिए। इसके बजाय विभाग क्रशर इकाइयों के परिसरों में खड़े होकर ऐसी जिम्मेदारियां निभाने का दबाव बना रहा है, जिन्हें उद्योग संचालक अपने स्तर पर पूरा नहीं कर सकते। एसोसिएशन के अनुसार, अवैध खनन पर प्रभावी कार्रवाई उसके मूल स्रोत पर होनी चाहिए, न कि केवल क्रशर इकाइयों की निगरानी तक सीमित रहनी चाहिए।
एसोसिएशन ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार इन समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए समयबद्ध सुधार लागू करेगी। प्रतिनिधियों ने दोहराया कि एसोसिएशन ट्रांसपेरेंट रेगुलेशन, अवैध खनन पर रोक, सरकारी राजस्व की सुरक्षा और पंजाब के स्टोन क्रशर उद्योग के सतत विकास के लिए सरकार के साथ मिलकर काम करने को तैयार है।
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